मेरे बाद जिस ने मेरी किसी ऐसी सुन्नत को जिंदा किया जो मिट चुकी थी तो उस को उस पर अमल करने वाले की तरह सवाब मिलेगा । [तिर्मिज़ी: 2677] जिस ने मेरी अताअत की [कहना माना] वह जन्नत मे दाख़िल होगा । [बुखारी: 7280] प्यारी सुन्नतें
09/12/2016 * छिंकते वक़्त अपने चहरे को ढांपना । [अबु दाऊद: 5029]
3. जब कोई तुम्हारा हाल पुछे तो "अल्हम्दुलिल्लाह" कहो । [तबरानी औसत: 4374]
4. किसी काम का इरादा या वादा करते वक़्त "इंशाअल्लाह" कहो । [बुखारी: 5242]
5. जब कोई तुम पर अहसान करे उसे "जज़ाक अल्लाहु ख़ैर" कहो । [तिर्मिज़ी: 1954]
6. नेमत मिलने पर "अल्हम्दुलिल्लाह" कहो । [इब्न माजह: 3805]
7. किसी मुसिबत या मौत की ख़बर सुनने पर "इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन" कहो । [मुस्लिम: 2126]
8. छिंक आने पर "अल्हम्दुलिल्लाह" कहो और सुनने वाला "यरहमुकल्लाह" कहे । [मुस्लिम: 2992]
9. किसी अच्छी चिज़ देखने पर "माशाअल्लाह ला क़ुव्वता इल्लाबिल्लाह" कहो । [इब्न सुन्नी: 207]
10. घर मे दाख़िल होते वक़्त "बिस्मिल्लाह" कहो । [मुस्लिम: 2078] 11. हर नेक और जाएज़ काम सिधी तरफ़ से शरू करना । [सही मुस्लिम: 617] 12. किसी से बात करते वक़्त उस वक़्त तक तवज्जाह न हटाना जब तक वह न हटाए । [इब्न माजह: 3716]
13. बैतुल ख़िला से निकलते वक़्त वज़ू करना । [इब्न हब्बान: 1441]
14. मस्जिद मे दाख़िल होते वक़्त पहले सिधा क़दम रखे । [हाकिम: 1/218]
15. मस्जिद से बाहर निकलते वक़्त पहले उलटा क़दम रखे । [हाकिम: 1/218] 40 प्यारी सुन्नतें 1. सलाम करना । [बुखारी: 94]
2. अपना काम ख़ुद करना । [इब्न हब्बान: 5675]
3. ज़मीन पर बैठ कर खाना । [मुस्लिम: 2044]
4. बुराई का बदला बुराई से न देना । [तिर्मिज़ी: 216]
5. माफ़ करना । [तिर्मिज़ी: 216]
6. नर्मी से बात करना । [मुस्लिम: 2591]
7. अल्लाह की राह मे ख़र्च करना । [बुखारी: 4997]
8. तोहफ़े के बदले मे तोहफ़ा देना । [बुखारी: 2585]
9. ख़ुशी मिलने पर सजदा ए शुक्र अदा करना । [अबु दाऊद: 2774]
10. जुता सिधी तरफ़ से पहेनना । [तिर्मिज़ी: 608]
11. कंगी सिधी तरफ़ से करना । [तिर्मिज़ी: 608]
12. सर मे तेल लगाना । [मुस्लिम: 2344]
13. इमामा बांधना । [मुस्लिम: 1359]
14. तीन उंगलीयों से खाना । [मुस्लिम: 2023]
15. खाने बाद उंगलीयां चाटना । [मुस्लिम: 2023]
16. खजूर खाना । [मुस्लिम: 2044]
17. कद्दू [लौकी] खाना । [तिर्मिज़ी: 1850]
18. ककड़ी के साथ खजूर खाना । [मुस्लिम: 2043]
19. ख़रबुज़े के साथ खजूर खाना । [अहमद: 13449]
20. खड़े हो कर ज़मज़म पिना । [तिर्मिज़ी: 1882]
21. तीन सांसों मे पानी पिना । [तिर्मिज़ी: 1884]
22. ख़ुशबू लगाना । [अबु दाऊद: 4162]
23. मुस्कूराना । [तिर्मिज़ी: 3642]
24. दावत क़ुबूल करना । [ तिर्मिज़ी: 1215]
25. औरतों से मुसाफ़ा न करना । [नसाइ: 4195]
26. टेक लगा कर न खाना । [बुखारी: 5298]
27. मिठी चिज़ और शहेद खाना । [मुस्लिम: 1474]
28. जुमेरात को सफ़र करना । [बुखारी: 2950]
29. छोटे बच्चों के सर पर मोहब्बत से हाथ फेरना । [अबु याला: 1457]
30. निकाह करना । [इब्न माजह: 1846]
31. खाने से पहले हाथ धोना । [नसाइ: 256]
32. खाने मे ऐब न निकालना । [बुखारी: 5409]
33. वज़ू से पहले बिस्मिल्लाह कहना । [नसाइ: 78]
34. कपड़ा सिधी तरफ़ से पहेनना । [अबु दाऊद: 3488]
35. छिंक आने पर अल्हम्दुलिल्लाह कहना । [अहमद: 1/204]
36. किसी के घर मे दाख़िल होने से पहले इजाज़त लेना । [अबु दाऊद: 5186]
37. बच्चों और घर वालों पर रहेम करना । [मुस्लिम: 2316]
38. बच्चों को सलाम करना । [इब्न अबी शैबा: 8/445]
39. सर के बालों के बीच से मांग निकालना । [अबु दाऊद: 4189]
40. कंगी करना । [मुस्लिम: 297]
मगर याद रखें: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रोज़ाना कंगी करने से मना फ़रमाया है । [नसाइ: 5057] पानी पिने की सुन्नतें 1. पानी बैठ कर पिये । [बुखारी: 6452]
2. पानी सिधे हाथ से पिये । [बुखारी: 5380]
3. पानी पिने से पहले बिस्मिल्लाह कहे । [तिर्मिज़ी: 1885]
4. पानी तीन सांस मे पिये । [बुखारी: 5631]
5. पानी पिने बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहे । [तिर्मिज़ी: 1885]
6. लोगों को पानी पिलाते वक़्त पहले उसे पिलाए जो सिधी तरफ़ हो । [बुखारी: 5612]
7. लोगों को पानी पिलाने वाला सब के बाद मे पानी पिये । [तिर्मिज़ी: 1894] खाना खाने की सुन्नतें 1. खाना खाने से पहले हाथ धोए । [नसाइ: 256]
2. खाना ज़मीन पर बैठ कर खाए । [मुस्लिम: 2044]
3. टेक लगा कर न खाए । [बुखारी: 5298]
4. खाना "बिस्मिल्लाह" पढ़ कर खाए और अगर भूल जाए तो "बिस्मिल्लाही फि अव्वलाही व आख़िरीही" [बिस्मिल्लाह अव्वलाहु व आख़िराहु] कहे । [तिर्मिज़ी: 1858]
5. खाना सिधे हाथ से खाए । [मुस्लिम: 5265]
6. अपने सामने से खाए । [बुखारी: 3576]
7. खाना अपने क़रीब से खाए बीच मे से न खाए । [अहमद: 2439]
8. तीन उंगलीयों से खाना खाए । [मुस्लिम: 2032]
9. ज़्यादा गर्म खाना न खाए । [अहमद: 26958]
10. खाने मे ऐब न निकाले । [बुखारी: 5409]
11. खाना पेट भर कर न खाए । [तिर्मिज़ी: 2380]
12. खाना मिल कर खाए । [अबु दाऊद: 3764]
13. पहले बुज़र्ग हज़रात खाने की शरूआत करे फिर सब । [मुस्लिम: 5259]
14. गिरा हुआ खाना उठा कर खाए । [मुस्लिम: 2034]
15. खाने बाद उंगलीयाँ चाटे । [अबु दाऊद: 3847]
16. खाने बाद "अल्हम्दुलिल्लाह" कहे । [मुस्लिम: 2734]
17. और यह दुआ पढ़े:
الحمدلله الذی اطعمنی هذا ورزقیه من غیرحول منی ولا قوۃ
[तिर्मिज़ी: 3458]
18. खाने बाद हाथों को धोए । [तिर्मिज़ी: 1860] सोने की सुन्नतें 1. वज़ू करना । [मुस्लिम: 2710]
2. बिस्तर झाड़ना । [बुखारी: 6320]
3. आयतुल कुर्सी पढ़ना । [बुखारी: 4624]
4. सोने से पहले सुरह एख़लास सुरह, फ़लक और सुरह नास पढ़ना और हाथो पर फूंक कर पुरे बदन पर फेरना । [बुखारी: 644]
5. 33 बार सूब्हानअल्लाह , 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह और 34 बार अल्लाहु अकबर पढ़ना । [बुखारी: 4943]
6. सुरह काफ़िरून पढ़ना । [अबु दाऊद: 5016]
7. सुरह बक़रह की आख़री दो आयत पढ़ना । [अबु दाऊद: 1397]
8. सिधी करवट सोना और सिधा हाथ चहरे के निचे रखना । [बुखारी: 6314]
9. यह दुआ पढ़ना: अल्लाहुम्मा बिस्मुका आमुतू वा अहया । [बुखारी: 6314] सो कर उठने की सुन्नतें 1. यह दुआ पढ़ना:
الحمدلله الذی احیانا بعد ما أ ما تنا ولیه النشور
[मुस्लिम: 6549]
2. मिसवाक करना । [बुखारी: 246]
3. तीन बार दोनो हाथ धोना । [मुस्लिम: 541]
4. तीन बार नाक झाड़ना । [बुखारी: 516]
5. निदं का असर ख़त्म करने के लिए चहरे पर हाथ फेरना । [बुखारी: 183] जुमा की सुन्नतें 1. गुस्ल करना और अच्छे या सफ़ेद कपड़े पहनना । [अबु दाऊद]
2. मिसवाक करना । [बुखारी]
3. खुशबू लगाना । [बुखारी]
4. सुरह ए कहफ़ पढ़ना । [हाकिम]
5. कसरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ना । [अबु दाऊद]
6. सब काम छोड़ कर नमाज़ ए जुमा के लिये जाना । [सुरह जुमा]
7. नमाज़ ए जुमा के लिये पैदल जाना । [अबु दाऊद]
8. अज़ान से पहले नमाज़ ए जुमा के लिये मस्जिद जाना और पहली सफ़ मे बैठना । [बुखारी]
9. इमाम के क़रीब बैठना । [अबु दाऊद]
10. मस्जिद मे बैठने से पहले दो रकात पढ़ना । [बुखारी]
11. लोगों की गर्दने न फलांगना जहां जगह मिले वहां बैठ जाना । [अबु दाऊद]
12. ख़ुत्बा सुनना और उस पर अमल करना । [मुस्लिम]
13. ख़ुत्बा के वक़्त खामोश रहना । [बुखारी]
14. अल्लाह का कसरत से जिक्र करना । [सुरह अहज़ाब] ईद की सुन्नतें 1. ईद का चाँद देख कर तकबीरात कहना शरू करना । [क़र्तबी: 3/479]